मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण के साथ होंगे चुनाव

मध्यप्रदेश की राजनीति के इतिहास में नया अध्याय जुड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश जारी कर अब पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के साथ कराने का निर्णय सुनाया है। यह निर्णय बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सुनाया है। इस निर्णय के बाद से ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जल्द ही नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव होने की उम्मीद जताई जा रही है। इन सबके बीच ओबीसी आरक्षण को लेकर श्रेय लेने की राजनीति भी हो रही है। प्रमुख पार्टियां इसे अपने प्रयास बता रही है।

उल्लेखनीय है कि लंबे समय से आरक्षण को लेकर असमंजस की स्थिति थी। न्यायालय में यह मामला होने के कारण चुनाव भी नहीं हो पा रहे थे। न्यायालय के निर्णय के बाद उम्मीद जताई जा रही है जून माह में चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके लिए प्रशासनिक तैयारियां भी तेज कर दी गई है। बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय न राज्य सरकार के पुनर्विचार आवेदन पर सुनवाई करते हुए राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा किए गए ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट को मान्य किया है।

फैसले के मुताबिक आरक्षण किसी भी सूरत में 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए आबादी के हिसाब से अधिकतम 35 प्रतिशत सीट 50 प्रतिशत के आरक्षण की सीमा में रहते हुए आरक्षित की जा सकेंगी। यही नहीं आरक्षण की प्रक्रिया को एक सप्ताह के भीतर करने के न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता सैयद जाफर ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर इसे संविधान की जीत बताया है। वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी इसे अच्छा निर्णय बताया है।

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण के साथ होंगे चुनाव

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