खरगोन में दंगों के बाद औवेसी की पार्टी को जनसमर्थन, कांग्रेस हारी

खरगोन शहर में 10 अप्रैल को रामनवमी पर शोभायात्रा के दौरान पथराव और फिर कफ्र्यू का असर नगर पालिका चुनाव में देखने को मिला। हाल ही में हुए 33 वार्डों में पार्षद पद के चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी। खास बात यह रहा कि वोटों का ध्रुवीकरण होने से ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को मुस्लिम बहुल वार्डों में जनता का समर्थन मिला। तीन वार्डों से एआईएमआईएम के पार्षद चुनकर आए। जबकि कांग्रेस महज चार वार्ड में ही पार्षद पद पर काबित हो सकी। सबसे ज्यादा 18 सीटों भाजपा को मिली है। जबकि अन्य सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। इन सबके बीच एक बार फिर मतदाताओं ने साबित कर दिया है कि वे सुनते सबकी हैं परंतु करते अपने मन की है। गौरतलब है कि नगर पालिका में 33 वार्डों में पार्षद पद के चुनाव हुए थे। 20 जुलाई को नतीजे घोषित किए गए हैं।

चुनाव परिणाम आए चौकाने वाले

नगर पालिका के चुनाव परिणाम इस बार चौकाने वाले आए हैं। भाजपा पहले जिन मुस्लिम बहुल वार्डों में कांग्रेस को बहुमत मिलता था वहां इस बार कांग्रेस जीतने के लिए तरस गई। अधिकांश मुस्लिम बहुल वार्डों में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई। कई वार्डों में में हाताल यहां तक बने कि कांग्रेस के प्रत्याशी तीसरे या चौथे स्थान पर आए। मुस्लिम बहुल वार्डों में तीन पार्षद पहली बार चुनाव लड़ रही एआईएमआईएम से चुनकर आए हैं। वहीं मुस्लिम बहुल तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आए हैं। एक मुस्लिम बहुल वार्ड में भाजपा के भोलू कर्मा की जीत ने भी सभी को चौका दिया। इस वार्ड से चार प्रत्याशी मैदान में थे। वहीं एआईएमआईएम से वार्ड दो से हिंदू प्रत्याशी अरुणा श्यामलाल उपाध्याय ने भी चुनाव जीतकर सभी को चौका दिया। अनुसूचित जाति और मुस्लिम बहुल इस वार्ड से कांग्रेस और भाजपा सहित कई निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में थे। इन सबके बीच अब देखना है कि नगर पालिका का अध्यक्ष कौन चुना जाता है।

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